Monday, January 16, 2012

4084

फिल्म समीक्षा

कहां से चली कहां पहुंची 4084

धीरेन्द्र अस्थाना

फिल्म ‘4084’ के लिए स्वयं नसीरुद्दीन शाह भले ही यह कहें कि ‘इसकी कहानी एकदम अलग थी, इसलिए नेरेशन के पहले मिनट में ही मैंने इसे करने की सहमति दे दी।’ लेकिन हकीकत यह है कि दिलचस्प ढंग से फिल्माने के बावजूद यह एक साधारण मसाला फिल्म है। मूलरूप से ‘4084’ एक कॉमेडी थ्रिलर है लेकिन इसमें बॉलीवुड के सभी मसालों का तड़का लगाया गया है। इमोशन का, सेक्स का, आइटम नंबर का, हास्य का और एक्शन का। एक बहुत पुरानी फिल्म का गाना था- ‘जाते थे जापान पहुंच गये चीन, समझ गये न।’ बिल्कुल इसी तर्ज पर ‘4084’ की कहानी बुनी गयी है। चार टपोरी टाइप के चरित्र पुलिस भेष में पुलिस वैन 4084 चुराकर एक वीरान घर से 20 करोड़ के असली नोट हड़पने का प्लान बनाते हैं। इस घर में असली नोटों के बदले डबल करके नकली नोट दिए जा रहे हैं। चौथे दिन वहां बचेंगे सिर्फ असली नोट, जिसके रखवाले हैं केवल दो गुंडे। यह कहानी बताकर नसीर साहब अपने साथ के के मेनन, अतुल कुलकर्णी और रवि किशन को लेते हैं। चारों की चार कहानियां, चार अतीत और चार वर्तमान हैं। अगर बीस करोड़ मिल जाएं तो चारों अपने अतीत और वर्तमान से छुटकारा पाकर अपने-अपने सपनों के भविष्य में छलांग लगा सकते हैं। कहानी में यू टर्न तब आता है, जब इन चारों की वैन को एक सचमुच का पुलिस आफिसर रोक लेता है। इसे एक गैंगस्टर जाकिर हुसैन की तलाश है, जो द्वारका लॉज के किसी कमरे में छिपा है। वह इन चारों को अपनी मदद के लिए साथ में ले लेता है। अब ये चारों पुलिस वाले तो हैं नहीं, इसलिए पुलिस का काम करते समय कैसे इनके छक्के छूटते हैं, इस स्थिति से कॉमेडी पैदा की गयी है। फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि फिल्म के चारों किरदार एकदम सड़क के स्वाभाविक टपोरी लगते हैं। अपने अब तक के करियर में अतुल कुलकर्णी ने पहली बार डांस किया है और झकास ठुमके लगाए हैं। के के तो स्वाभाविक अभिनय के मास्टर हैं। उनके और अतुल के बीच हुए कुछ संवाद चुटीले और मजेदार हैं। फिल्म की एक अलग अदा यह जरूर है कि कई घटनाक्रमों को पार करने के बाद अंत में इन चारों को बीस करोड़ के नोट हाथ लग ही जाते हैं। फिल्मों में चूंकि हीरोईन होती ही है, इसलिए इसमें भी है। नहीं भी होती तो कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हीरोईन श्वेता भारद्वाज से सिर्फ डांस करवाया गया है। फिल्म के दोनों आइटम नंबर ‘सेटिंग झाला’ और ‘बदमस्त’ छोटे शहरों में लोकप्रिय हो सकते हैं।

निर्देशक: हृदय शेट्टी
कलाकार: नसीरुद्दीन शाह, के के मेनन, रवि किशन, अतुल कुलकर्णी, जाकिर हुसैन, श्वेता भारद्वाज
संगीत: ललित पंडित/विशाल राजन

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